जब कभी भी राहु केतू के बीच मे सारे ग्रह आ जाते है और लगातार पाँच भाव खाली रह जाते है तो 12 प्रकार का काल सर्प योग बंता है!

1. अनन्त काल सर्प योग – लग्न मे राहु सातवे केतू हो तो यह योग बनता है! इसमे जन्मा बालक रोगी रहता है! गृहस्थ सुख भोगने मे बार बार रुकावट होती है!

2. कुलिक काल सर्प योग – दूसरे राहु आठवे केतू हो तो यह योग बनता है, बालक धनहीन, कर्जदार रहता है! शरीर कमजोर, आयु थोड़ी व दुखी रहता है!

3. वासुकि काल सर्प योग – तीसरे राहु नौवे केतू हो तो यह योग बनता है, माता-पिता, भाई-बंधुओ की फटकार, मुकदमे कसे वैगरा मे हार खाता है!

4. शंख पाल काल सर्प योग – चौथे घर मे राहु व दसवे घर केतू हो तो यह योग बनता है, माँ का सुख कम मिलता है, मानहानि, धनहानी, मकानहानि से दुखी रहता है!

5. पदम काल सर्प योग – पांचवे राहु व ग्यारहवे केतू हो तो यह योग बनता है, संतान होने मे रुकावट, पेट मे तकलीफ, पढ़ाई मे वाहन मे भाग्य कमजोर होता है!

6. नाभ काल सर्प योग – छटे घर मे राहु बारहवे घर मे केतू हो तो यह योग बनता है, समाज मे अपमानित होता है, कलंक, कुसंग, जेल यात्रा व मारपीट होती रहती है!

7. तक्षक काल सर्प योग – सातवे राहु व पहले घर मे केतू हो तो यह योग बनता है, गृहस्थी जीवन बिगड़ जाता है, तलाक व बनवास जैसा जीवन बीतता है!

8. कर्कोटक काल सर्प योग – आठवे राहु व दूसरे घर मे केतू हो तो यह योग बनता है, शरीर मे बीमारी, सूखी पीड़ा, पैसे की कमी, दुखी, क्रोधी व तनाव ग्रस्त रहता है!

9. शंख नाद काल सर्प योग – नौवे राहु व तीसरे घर मे केतू हो तो यह योग बनता है, भाग्य कमजोर, दरिद्री जीवन बार बार अपमान स्थान त्याग वैगरा होता है!

10. पातक काल सर्प योग – दसवे राहु व चौथे केतू हो तो यह योग बनता है, धर्म त्याग कर पैसा कमाता है, समाज मे इज्जत नही होती व एकांत रहता है!

11. विषाक्त काल सर्प योग – ग्यारहवे घर मे राहु व पांचवे घर मे केतू हो तो यह योग बनता है, बुद्धि कमजोर, ठग्गी, चोरी, लॉटरी, जुआ खेलने का व्यसन लग जाता है!

12. शेष नाग काल सर्प योग – बारहवे घर मे राहु व छटे घर मे केतू हो तो यह योग बनता है, पति-पत्नी मे क्लेश, संतान निकम्मी, शत्रुओ का डर, अपहरण होने का भय रहता है!

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